माननीय गृह मंत्री दिनांक: 27-06-2020
गृह मंत्रालय
नार्थ ब्लॉक सेंट्रल
सेक्रेट्रिएट
नई दिल्ली 110001
विषय: धर्मांतरण पर कानून
की आवश्यकता
महोदय,
मैं अगर भारत के सन्दर्भ
में ही बात करूँ तो किशोर अवस्था से ही स्वेक्छा से धर्मान्तरण के बारे में सुनता
चला आ रहा हूँ |
यह धर्मान्तरण
सिर्फ दो ही धर्मों में क्यों होता है ? क्या यह दो धर्म ही विश्व के सर्वोत्तम धर्म
पद्धिति हैं या कुछ और ? निश्चित रूप से हर कोई इसका उत्तर जानता है | आश्चर्य होता है
कि सदियों तक जबरन धर्मांतरण होने पर भी तथाकथित सेक्युलर चुप रहते हैं और कुछ बहस
का हिस्सा बन धृष्टता ही करते हैं | इन सभी को भी इसमें शर्मिंदगी तो दूर बल्कि गर्व की अनुभूति
होती है | कब तक चलेगा यह
सिलसिला ?
जब हम जन्म मृत्यु प्रमाण
पत्र के साथ साथ अब विवाह पंजीकरण की बात करते हैं तो क्यों नहीं धर्म पंजीकरण भी
कराएं ? जो कोई धर्म
लिखना चाहें लिखे | सारे ऑप्शन दिए जाएं | किसी को भी वयस्क
होने पर धर्म परिवर्तन की अनुमति हो |
जब हम आज हिन्दू विवाह
अधिनियम 1955 से बंधे हैं और
तलाक के लिए न्यायालय की अनुमति और लम्बी प्रक्रिया से गुज़रने को मजबूर हैं तो
क्यों नहीं धर्मान्तरण की एक सरल किन्तु न्यायिक अनुमति की अनिवार्य शर्त हो | जिस तरह हमें अपना नाम बदलने की समाचार पत्र
में विज्ञापन प्रक्रिया से गुज़रना होता है उसी तर्ज पर धर्मान्तरण का भी विज्ञापन
अनिवार्य हो ?
क्यों नहीं धर्मान्तरण के
लिए तलाक़ की तर्ज पर 6 माह का कूलिंग पीरियड रखा जाये ?
दवाब, धन अथवा दूसरे लालच नहीं दिया गया है ऐसा शपथ पत्र
हो और न्यायालय से ही प्रमाण पत्र जारी हो | भविष्य में शपथ
पत्र झूंठ पाए जाने पर न सिर्फ स्वयं उसे बल्कि धन लालच अथवा दवाब बनाने वाले को
भी सज़ा हो |
भवदीय,
सुबोध कुमार अग्रवाल
307 पुरानी आवास
विकास कॉलोनी
सिविल लाइन्स रामपुर उ.
प्र. 244901
मोबाइल: 9837100538
प्रतिलिपि: 1-
माननीय
राष्ट्रपति 2- माननीय उपराष्ट्रपति
3- माननीय अध्यक्ष
लोकसभा 4- माननीय प्रधान
मंत्री
5- माननीय कानून और
न्याय मंत्री
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