आज़ाद भारत की पहली हर दृष्टि से लाभकारी योजना ‘ उज्जवला ‘ है जिसमे न तो
सरकार का कोई पैसा खर्च हुआ न किसी और का | न सिर्फ उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचा बल्कि
देश, सरकार, आयल कंपनी, डिस्ट्रीब्यूटर, manufacturer सभी को लाभ मिला | उपरोक्त
सभी को आजीवन प्रति वर्ष बचत और लाभ मिलता रहेगा | सरकार इस बचत का उपयोग अन्यत्र
कर सकेगी | आइये जाने कैसे ?
1-
उज्ज्वला योजना में सरकार ने चार वर्षो में 6 करोड़ लोगों को
गैस कनेक्शन से लाभान्वित करने का निर्णय किया | इसकी पात्रता निर्धरित की | एक
गैस कनेक्शन पर प्रति उपभोक्ता केंद्र सरकार ने रु 1800/- का धन उपलब्ध कराया यानि
चार सालों में कुल रु 10800/- करोड़ | शेष लगभग रु 1800/- तक प्रति उपभोक्ता आयल
कंपनियों द्वारा चूल्हे और प्रथम गैस के लिए लोन दिया गया जिसको उपभोक्ता को गैस पर
मिलने वाली subsidy से अगले 1-2 वर्षों में adjust किया जायेगा | इससे गैस
कंपनियों को कोई नुकसान नहीं होने वाला सिवाय मामूली ब्याज के | इसके एवज में कम्पनियों
को फायदा बढ़ी बिक्री से हमेशा के लिए होगा |
2-
सरकार जिनको यह सुविधा दे रही है उनको केरोसीन की आवश्यकता
कम होगी और सरकार को केरोसीन पर आजीवन subsidy की बचत होगी जो इस रु 10800/- करोड़
से कहीं ज्यादा होगी | सरकार को 6 करोड़ उपभोक्ताओं को जो अतिरिक्त सब्सिडी देनी
होगी वह भी भरेपूरे उपभोक्ताओं द्वारा स्वेक्छिक सब्सिडी छोड़ने से पूरी हो जायेगी
| गरीब उपभोक्ता अन्य उपभोक्ता से आधी से कम गैस की खपत करता है |
3-
उज्ज्वला योजना के दो छुपे हुए बड़े लाभ में से एक है पर्यावरण
को होने वाले नुक्सान में कमी | लकड़ी आदि के उपयोग में कमी से अवांछित गैसों के
उत्सर्जन में कमी व जंगलों की लकड़ी कटोती में कमी आयेगी |
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ
गृहणियों एवं उनके परिवारिक सदस्यों के स्वास्थ्य को हुआ | आँखों व सांस संबंधी
बीमारियाँ जो लकड़ी उपलों आदि के उपयोग के कारण पनपती थीं अब कम होंगी और उसका लाभ
न सिर्फ स्वास्थ्य पर अपितु बीमारी पर होने वाले खर्च में उपभोक्ता व सरकार को भी
होगा क्योकि सरकार हज़ारों करोड़ रुपया बीमारी के इलाज पर खर्च करती है |