कृपया
youtube वीडियो "अपना अपना सोच" पर भी मेरे विचार जाने | यह पत्र
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Grievance Management 2875/SCI/PIL (E)/2020
में रजिस्टर्ड |
सेवा में,
दिनांक: 09-08-2019
मुख्य न्यायाधीश
सर्वोच्च
न्यायालय नई दिल्ली विषय: न्यायालय में व्याप्त आर्थिक/ गैर आर्थिक
भ्रष्टाचार, निष्क्रियता, निरंकुशता, अहंकार और तानाशाही के सम्बन्ध में
महोदय,
मैं जानता हूँ कि 70 साल से बिगड़े सिस्टम और उसके तहद बिगड़े लोगों
को सुधारना आसान काम नहीं| आपमें तो इच्छा शक्ति का अभाव है |
मोदी जी से देश को बहुत
उम्मीदें हैं और अगले 5 सालों में काफ़ी परिवर्तन की उम्मीद भी है लेकिन न्यायालय को
सुधारना उनके लिये भी बड़ी चुनौती होगी फिर भी उम्मीद है कि माननीय अमित शाह जी और
माननीय रविशंकर प्रसाद जी इस कार्य को भी प्रधान मंत्री जी के साथ पूरा ज़ोर लगा कर अगले 5 साल में कर
डालेंगें क्योंकि देश की समस्यायों की जड़ में न्यायालय में व्याप्त आर्थिक/ गैर
आर्थिक भ्रष्टाचार, निष्क्रियता, निरंकुशता, अहंकार और तानाशाही है | किसी भी देश की न्यायिक प्रक्रिया और शिक्षा प्रणाली उस देश की सभ्यता और संस्कृति की रक्षा
करती है | हमारा न्यायालय
ना तो अंग्रेजों जितना शक्तिशाली है और ना ही उनके जैसा दमनकारी तो फिर जिस समाज
ने अंग्रेजों को उखाड़ फेका वह इस न्यायिक व्यवस्था को भी ठीक करने की भी क्षमता
रखता है | 200 वर्षों तक 20 करोड़ भारतीय सोते रहे, उनमे से सिर्फ मुश्किल से
20 हज़ार लोगों के दिल में आग लगी और वह मुश्किल से
20 लाख लोगों को ही आंदोलन में सीधे तौर पर जोड़
पाए और हमें आज़ाद भारत में जन्म लेने और सांस लेने के लिए दुनिया छोड़ कर चले गए | मैं तो इंतज़ार कर रहा हूँ कि कब आप अपने
ब्रह्मास्त्र जिससे आपने भारतीय समाज को भयभीत कर रखा है, चलाएं ताकि मेरा आंदोलन का बीज पड़
सके | आपकी निष्क्रियता हो या अति सक्रियता, दोनों को ही मेरा प्रणाम |
भवदीय
सुबोध कुमार अग्रवाल
307 पुरानी आवास विकास कॉलोनी
सिविल लाइन्स रामपुर उ. प्र. 244901 मोबाइल: 9837100538
प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति भारत सरकार 2- माननीय उपराष्ट्रपति भारत सरकार
3- माननीय अध्यक्ष लोकसभा 4- माननीय प्रधान मंत्री भारत सरकार
5- माननीय कानून और
न्याय मंत्री
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