Sunday, 7 June 2020

Improvement in courts and justice to people of India

कृपया youtube वीडियो  "अपना अपना सोच" पर भी मेरे विचार जाने | यह पत्र सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Grievance Management 1917/SCI/PIL (E)/2019 में रजिस्टर्ड |

सेवा में,                                                                        दिनांक: 05-11-2019
मुख्य न्यायाधीश
सर्वोच्च न्यायालय 
नई दिल्ली                                                                                                                         
                        
महोदय,
धिक्कार है ऐसे सर्वोच्च न्यायालय पर जो वकीलों की कॉपी पेस्ट वाली पेटिशन स्वीकार करता है जिसमे न सिर्फ शहर का नाम और कार्य करने की कंपनी का नाम गलत लिखा हो बल्कि पूरे के पूरे आरोप कॉपी पेस्ट कर पेटिशन दाखिल कर देता हो | झूठे आरोपों और एफिडेविट दाखिल करने पर सजा भी नहीं | वकीलों ने दुकाने खोल रखी हैं | मीडिएटर भी दुकान खोलकर बैठी है उसे पता ही नहीं कि केस क्या है बस कहती है कि 80 लाख दे दो पीछा छुड़ायो | कहती है कि सुप्रीम कोर्ट में वकील 5-7 लाख एक सुनवाई के लेता है | कई साल निकल जायेंगे | कहती है मिनट बनाने का नियम नहीं है | कड़वा और उस पर नीम चढ़ा | जज बिना एक शब्द सुने कैवेट लगी होने के बावजूद 5 सेकंड में केस 39940 वर्ष 2018 का फैसला सुना देते हैं और फैसले में झूंठ लिखते हैं कि " Having heard the learned councel for the parties and gone through ". भावी CJI बोबड़े जी को आम आदमी के साथ हो रहे व्यवहार और अत्याचार से पीढ़ा नहीं पहुंचती अलबत्ता जजों के ऊपर सोशल मीडिया में की गयी टिप्पड़ियों से पीढ़ा होती है | न्यायालयों में सुधार के लिए तो एक वाक्य नहीं कहते अलबत्ता ब्रम्हास्त्र से भारतीय समाज को डराते हैं वह समाज जो अंग्रेजों से नहीं डरा |
कपिल सिब्बल जैसे लोग जो सर्वोच्च न्यायालय को बगीचा समझते हैं जब चाहे सैर करने निकल जाते हैं और केस लगवा लेते हैं |  सर्वोच्च न्यायालय मंदिर केस की सुनवाई 10 साल बाद होने को justify करता है और चिदंबरम के लिए 10  दिन की भी वेट लिस्ट नहीं |
आपको कैसा लगेगा यदि डॉक्टर आपको इलाज की जगह तारीख पर तारीख दे क्योंकि भीड़ बहुत है और फिर आपकी बात सुने बगैर दवाओं का पर्चा थमा दे | एक तरफ आप 24x7 बिजली, पानी, टेलीफोन, रेल,बस, हवाई जहाज, टैक्सी, पेट्रोल, होटल, रेस्टॉरेंट आदि को उपभोग करते हो दूसरी ओर सर्दियों, गर्मियों, सभी छोटे  बड़े त्यौहार, शनिवार, रविवार को न्यायालय को बंद रखते हो | निचली अदालतों में तो जज मुश्किल से दो घंटे भी नहीं बैठते |
स्कूलों पर प्रतिबन्ध लेकिन वकीलों की फीस पर कोई प्रतिबन्ध नहीं | सबके कार्यों पर उंगली उठाते हैं अपने ऊपर उंगली उठी तो ब्रम्हास्त्र की धमकी | न्यायालय में सुधार की स्वयं कोई बात नहीं करते दूसरा कहे तो हस्तक्षेप | यह कैसा न्याय है ?
जो भारतीय समाज सदियों से सुबह राम कृष्ण की पूजा करता है और शाम को उनकी समीक्षा, आज तक तो आस्था में कमी नहीं आयी | आप स्वयं को या तो भगवान से ऊपर मानते हो या फिर अपने अंदर व्याप्त भय को उजागर करते हो |

भवदीय,

             सुबोध कुमार अग्रवाल                                                                     
           307 पुरानी आवास विकास कॉलोनी
         सिविल लाइन्स रामपुर उ. प्र. 244901
           मोबाइल: 9837100538
          प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति भारत सरकार                   2- माननीय उपराष्ट्रपति भारत सरकार
                            3- माननीय अध्यक्ष लोकसभा                            4- माननीय प्रधान मंत्री भारत सरकार
                            5- माननीय कानून और न्याय मंत्री
 

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