Friday, 12 June 2020

न्यायालयों की कार्य प्रणाली और बंधक भारतीय नागरिक


कृपया youtube वीडियो  "अपना अपना सोच" पर भी मेरे विचार जाने | यह पत्र सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Grievance Management 40597/SCI/PIL (E)/2019 में रजिस्टर्ड |

सेवा में,                                                                        दिनांक: 02-08-2019
मुख्य न्यायाधीश
सर्वोच्च न्यायालय 
नई दिल्ली                                                                                                                         
महोदय,
आपके कार्यालय द्वारा जारी संलग्न पत्र में भारतीय संविधान की धारा 235 का उल्लेख किया है उसके लिए आपका धन्यवाद | ज़रा आप पेटिशन न. 39940 वर्ष 2018 के सम्बन्ध में जजों द्वारा हमारी caveat लगी होने बाद भी, मौजूद हमारे अधिवक्ता से एक भी शब्द सुनने से इंकार कर 5 सेकंड में फैसला देने की धारा का भी उल्लेख कर दें ताकि आपके कोष में मैं एक और धन्यवाद जोड़ सकूं |
क्या आप उस धारा का भी उल्लेख करना चाहेंगे जिसके तहद निचले कोर्ट में जज सुबह 12 बजे से 1 बजे तक और 2. 30 से 3. 30 बजे तक मुश्किल से बैठते हैं ? क्या आप उस धारा का भी उल्लेख करना चाहेंगे किसके तहद वहां जज की नाक के नीचे पैसे लेकर डेट पर डेट देते  हैं और 5 मिनट की कुल सुनवाई के लिए 5 साल लगते हैं ? क्या आप उस धारा का भी उल्लेख करेंगे जिसके तहद महीनों तक क्या सालों तक सम्मन तालीम नहीं होते और पैसों पर पैसे लेने का खेल चलता रहता है ?
आप पुनः धारा 235 का हवाला देकर अपना कागज़ पूरा कर लेंगे | चलिए आपसे आपके सर्वोच्च न्यायालय की धाराओं की बात करते हैं | उपरोक्त पेटिशन न. 39940 वर्ष 2018 के 9 मई के फैसले की कॉपी पुणे कोर्ट में ढाई महीने बाद भी 24 जुलाई तक नहीं पहुंची, कृपया इसकी धारा का भी उल्लेख कर दें |
आइये उनके बारे में बात करते हैं जिन्हे माननीय शब्द सुनने में आंनद आता है | आपने स्वयं ने अपने खिलाफ झूंठे केस का निपटारा 4 दिन में कर लिया | इसकी भी धारा बताने का कष्ट करें |
चार जजों ने मीडिया में आकर काम के बटवारे जैसी कोई बात कही और फिर बंद कमरे में निपटा लिया, इसकी भी धारा बताने का कष्ट करें |
आपने जस्टिस कर्णन केस में मीडिया पर रोक लगाई और उनके द्वारा लिखे भ्रष्टाचार सम्बन्धी पत्र को बंद कमरे में निपटा लिया, इसकी भी धारा बताने का कष्ट करें |
1975 के आपातकाल में मौलिक अधिकार से आज तक अनेकों बार और फिर पेटिशन न. 39940 वर्ष 2018 के सम्बन्ध में मौलिक अधिकार का हनन किया, इसकी धारा भी बता दें तो मैं अपने कोष के धन्यवादों को आपके कोष में ट्रांसफर करने में प्रसन्नता महसूस करूंगा |
एक प्रश्न जो बार बार आपसे पूंछा जाता है कॉलेजियम सिस्टम से नियुक्ति संविधान की किस धारा के आप अंतर्गत करते हैं, उत्तर सुनकर जन सामान्य  को संतोष होगा |
आये दिन आप ऐसी टिप्पड़ियां करते हैं जिन्हे अपने फैसले में नहीं लिखते, क्या हमारे जैसे तकनीकी और  कानून के गैर जानकारों को धारा बताकर ज्ञान वर्धन करेंगें ?
कौन सा केस एक दिन में क्या आधी रात में सुन लिया जाएगा और कौन सा 10 साल तक भी नहीं | इसकी धारा की भी जानकारी जन साधारण को करा दें तो आपकी मेहरवानी होगी |
कब तक मौन धारण किये रहेंगें ? आपका यह मौन पितामह भीष्म का है या धृतराष्ट्र का यह भविष्य तय करेगा | श्री कृष्ण ने शिशुपाल का वध करने से पहले उसके सौ अपराध गिने थे | हम भारतीयों को न्यायालय में व्याप्त आर्थिक/ गैर आर्थिक भ्रष्टाचार, निष्क्रियता, निरंकुशता, अहंकार और तानाशाही से  मुक्ति दिलाने कोई तो कृष्ण जन्म लेगा |
मेरे पिता 93 वर्ष की आयु में जीवित और मैं 63 वर्षीय, उम्मीद कर सकता हूँ कि अभी मेरे पास 30 वर्ष से अधिक का समय और आपके पास बचें हैं न्यायालय में रहने के लिए चंद दिन | कब तक भागेंगे मुझसे, पेटिशन 39940 का भूत अवकाश प्राप्ति के बाद भी उन जजों का पीछा छोड़ने वाला नहीं |
भवदीय

सुबोध कुमार अग्रवाल                                                                     
307 पुरानी आवास विकास कॉलोनी                                            
सिविल लाइन्स रामपुर उ. प्र. 244901         मोबाइल: 9837100538
प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति भारत सरकार                2- माननीय उपराष्ट्रपति भारत सरकार
                   3- माननीय अध्यक्ष लोकसभा                        4- माननीय प्रधान मंत्री भारत सरकार
                  5- माननीय कानून और न्याय मंत्री

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