Sunday, 17 September 2017

अरुण जेटली एक अच्छे वित्त मंत्री ?



  मै अरुण जेटली को एक अच्छा वित्त मंत्री मानता हूँ क्योंकि उन्हें अपने कर्मचारियों और     संस्थाओं की बहुत चिंता रहती है जैसे बैंकों की, आयल कंपनियों की | बैंकों के कर्मचारियों के काम के घंटे स्कूल और अदालतों से ही टक्कर ले सकते हैं जहाँ छुटियाँ भी सबसे ज़्यादा होती हैं | आये दिन बैंकों में अपना वेतन कटवाकर हड़ताल रोकना उनके बस की बात नहीं है लेकिन दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी से क्या हासिल हुआ पता नहीं सिवाय 3-4 दिन लगातार बैंक बंद होने के | अब तो शायद हर शनिवार को बंद करने की तैयारी है | आपको ट्रेन, बस, हवाई जहाज, मेट्रो, बिजली पानी, संचार, मनोरंजन, होटल, पेट्रोल डीज़ल 24 घंटों चाहिए लेकिन इससे आया पैसा जमा करने के लिए औसत साढ़े चार घंटे प्रतिदिन बैंक में सेवा उपलब्ध है | बैंकों को पूरी आज़ादी कि वह जो चाहे नियम बनाएं और पैसा वसूल करें, स्वैप मशीन के द्वारा या एटीएम द्वारा | स्वैप मशीन में बैंकों का कोई खर्चा नहीं, ना कम्पूटर का, ना कागज़ का, ना स्टाफ का, ना ए.सी. का, ना ज़मीन बिल्डिंग का और पैसा हर मिनट जमा होता है | हर महीने व हर डिपाजिट पर कमीशन लेतें हैं | बचत खाते में यदि अनिवार्य रु 1000 से कम बैलेंस है तो सूचना नहीं देंगे बल्कि पेनल्टी लगा कर एकाउंट को जीरो बैलेंस पर ला कर बंद कर देंगें | अरे भाई पहले ही बंद कर दो या सूचना के पैसे उसके एकाउंट से काट लो | चेक बाउंस करने के बहाने ढूँढ़ते है क्योंकि पैसा मिलता है | खुद clearing ना हो पाने पर कोई सूचना नहीं देंगें | आये दिन इन्टरनेट कनेक्टिविटी न होने पर बाहर सूचना टांग देना ही काफी मान लेते हैं | दो इन्टरनेट कनेक्शन नहीं रखते |
क्रूड आयल का रेट 110 से 50 $ पर आ गया लेकिन पेट्रोल डीज़ल के रेट वही | एक्साइज बढ़ाकर पेट्रोल पर रु 21.5 व डीज़ल पर रु 17.5 प्रति लीटर कर दी | कहतें हैं इसका 40% राज्यों को जाता है | विपक्षी 50 साल से रेट बढने का रोना रोते हैं और अपने  राज्यों में % के हिसाब से सेल टैक्स होने के कारण बढ़े रेट के मज़े ले रहे हैं | दिल्ली में 27% वैट है आप GST में लायोगे तो क्या 28% GST लगाकर एक्साइज ख़त्म कर दोगे | कई गंदे प्रवक्ता टी. वी. भेज देते हैं जो मुद्दे की तो बात ही नहीं करते | मुद्दा एक्साइज का है जिससे रु 25/- से ज़्यादा पेट्रोल और रु 20/- से ज्यादा डीज़ल पर कम हो जाएगा क्योकि एक्साइज के ऊपर सेल्स टैक्स लगता है |
आयल कंपनी की सेहत का भी वह भरपूर ध्यान रखतें हैं | गेंडे की तरह फूल रही इन कंपनी को पहले एलपीजी सब्सिडी 38000 करोड़ प्रति वर्ष देते थे जब सब्सिडी रु 568 प्रति सिलिंडर थी और 100 करोड़ सिलिंडर बिकते थे 17-18 हज़ार करोड़ आयल कम्पनी वहन करती थीं और अब सरकार 18-20 हज़ार करोड़ देती है जबकि सब्सिडी वाले 100 करोड़ सिलिंडर बिकते हैं बाकि बगैर सब्सिडी के और औसत सब्सिडी रु 120 ही रह गयी है, यानि 22-24 हज़ार करोड़ का फ़ायदा |
अरुण जेटली पब्लिक हमदर्दी रखें भी क्यों, उन्हें तो पब्लिक ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था | चुनाव में हरा दिया कोई बात नहीं, अब झेलो |