Monday, 29 March 2021

निर्वाचन के लिए न्यूनतम शिक्षा की आवश्यकता और जेल मे बंद जनता की सेवा करता जन प्रतिनिधि

 

सेवा में,

मुख्य निर्वाचन आयुक्त                                 दिनांक: 30-03-2021

निर्वाचन सदन, अशोका रोड

नई दिल्ली 110001

विषय: निर्वाचन के लिए न्यूनतम शिक्षा की आवश्यकता और जेल मे बंद जनता की सेवा करता जन प्रतिनिधि

महोदय,

1-   जीवन के हर क्षेत्र मे न्यूनतम शिक्षा की आवश्यकता होती है तो फिर आज़ादी के 73-74 साल बाद जो बच्चा 6-7 का होगा अब 80 वर्ष का हो गया होगा और अनपढ़ रहकर चुनाव मे भाग लेना चाहता है कितना हास्यास्पद है | कोई भी नौकरी हो शिक्षा अवश्य चाहिए | शिक्षा और नौकरी/ व्यवसाय मौलिक अधिकार ना होकर अकेला चुनाव लड़ना ही मौलिक अधिकार रह गया है जबकि चुनाव लड़ने वाले मे एक जुनून होता है जो आम आदमी मे नहीं होता यदि समाज सेवा का इतना ही जुनून सवार है तो फिर वह व्यक्ति इस जुनून का उपयोग शिक्षा प्राप्त करने मे क्यों नहीं कर सकता ? जन प्रतिनिधित्व सेवा के लिए ना होकर सुलभ व्यवसाय का अवसर ना बन जाए | व्यवसाय नौकरी के लिए वर्षों मेहनत करनी होती है लेकिन उससे पहले शिक्षा ली जाती है जन प्रतिनिधि को ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए ?

2-   जन प्रतिनिधि जेल मे रहकर बगैर अपने क्षेत्र मे जाए 5 साल तक कैसे प्रतिनिधित्व करता है और सभी सुविधाओं के साथ वेतन लेता रहता है और फिर पेंशन भी ? क्या यह जनता के साथ अन्याय और जनता का मज़ाक उड़ाना नहीं है ? क्या यह जनता के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं है ? यह तर्क भी बेमानी हो जाता है क्योंकि 30-35 या 51 प्रतिशत वोटों की बदौलत वह जीतता है लेकिन प्रतिनिधित्व तो 100 प्रतिशत जनता का करता है उनका भी जिन्होंने उसको वोट नहीं दिया | जन प्रतिनिधि जेल मे रहकर चुनाव लड़े इससे हास्यास्पद क्या हो सकता है ?  

धन्यवाद,

भवदीय

 सुबोध अग्रवाल

प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति    2- माननीय उपराष्ट्रपति  3-माननीय प्रधानमंत्री 4- माननीय कानून एवं न्याय मंत्री                        

सरकारी तेल कंपनियों की मुनाफाखोरी और दिखावा

 

सेवा में,                                                          दिनांक: 09-03-2021

माननीय मंत्री जी

पट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय  

शास्त्री भवन नई दिल्ली

 महोदय,

देश सबसे बड़ी कंपनियों को कब तक पुराने सिस्टम को ढोते रहना चाहिए ? क्यों नहीं दुनिया की सबसे बड़ी डिस्ट्रब्यूशन कंपनी Amazon के डिस्ट्रब्यूशन नेटवर्क से सीखना चाहिए | तीनों सरकारी कंपनियाँ आपस मे ही प्रतिस्पर्धा करती हैं और जनता के पैसे को विज्ञापन और दिखावे पर खर्च करती हैं | टी वी और अखवार मे भी विज्ञापन देतीं हैं सब जनता के पैसे पर | तीनों कंपनियाँ एक ही रेट और सेवा सिस्टम अपनाती हैं तो प्रतिस्पर्धा कैसी ? क्या Amazon का कोई शोरूम या विज्ञापन देखा है ? तीनों कंपनियाँ गैस डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए 3x4 m की दुकान की आवश्यकता के लिए विज्ञापन देतीं हैं और फिर बाद मे प्राइम लोकेशन पर बड़े बड़े शोरूम बनाने का दवाब डालती हैं | डिस्ट्रीब्यूटर से भी से भी इसी तरह काफी धन खर्च करातीं हैं जिसका बोझ तो जनता पर ही पड़ता है | क्या आपने Amazon का लोगो लगा वाहन या delivery boy देखा है ?

अब जबकि प्रधानमंत्री जी और सरकार डिजिटल की बात करती है तो बहुत ही सरल सिस्टम अपनाया जा सकता है जिससे डिस्ट्रब्यूशन का खर्च भी कम होगा और smoothness भी आएगी | सेल्स ऑफिसर को भी गोदाम या शोरूम पर ऑडिट करने के लिए हर तीसरे माह नहीं आना पड़ेगा | आकस्मिक निरीक्षण और आपूर्ति विभाग का शोषण भी समाप्त हो जाएगा | कागज पैन की आवश्यकता भी नहीं रहेगी | हरेक सिलिन्डर पर फिलहाल सिर्फ बार कोड/ QR कोड लगाकर प्रक्रिया की शुरूवात करें | प्लांट से निकले हर सिलिन्डर की पूरी डिटेल प्लांट से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर और अंत मे ग्राहक के पास भी उपलब्ध होगी | Delivery man मोबाईल से स्कैन कर एप पर transfer करेगा | delivery man सील चैक कराएं और सुरक्षा ने नियम समझाए | Amazon कैश और on-line पेमेंट दोनों लेता है | बुकिंग से लेकर delivery और शिकायत सभी मोबाईल पर | Amazon का विश्वास देखिए बिना ना नुकर के सामान वापिस लेता है वजह चाहे कुछ भी हो |  

बिना सब्सिडी वाली घरेलू गैस आज रु 60 प्रति किलो और व्यावसायिक रु 87.25 प्रति किलो | जीएसटी  घरेलू पर 5% और व्यावसायिक पर 18% यानि व्यावसायिक गैस का रेट रु 67.50 प्रति किलो होना चाहिए | घरेलू और व्यावसायिक गैस की गुणवत्ता और composition मे कोई फ़र्क नहीं होता और इसको भरने व डिस्ट्रब्यूशन करने मे कोई अलग से खर्च नहीं होता है फिर भी कंपनियाँ इस पर करीब रु 20 प्रति किलो जोकि करीब 30% बनता है प्रीमियम चार्ज करती हैं जिसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ता है | आज की तारीख मे कंपनियाँ रु 18 प्रति सिलिन्डर सब्सिडी देती हैं और उससे कहीं ज़्यादा सरकार से लेती हैं | कंपनियाँ पेट्रोल या डीज़ल पर कोई सब्सिडी नहीं देती हैं | घरेलू सिलिन्डर पर सब कुछ बाज़ार हिसाब से है तो फिर सरकारी कंपनियों द्वारा व्यावसायिक सिलिन्डर पर प्रीमियम लेकर जनता का शोषण क्यों | इस कारण असामाजिक तत्व घरेलू सिलिन्डर से व्यावसायिक सिलिन्डर भरकर मुनाफा कमाते हैं और डिस्ट्रीब्यूटर पर दवाब बनाया जाता है | प्रशासन भी इनको पकड़ने मे सहयोग नहीं देता उलटे इसका आरोप भी डिस्ट्रीब्यूटर पर लगाया जाता है जबकि आज की तारीख मे नॉन सब्सिडी सिलिन्डर कितने भी लेने पर रोक नहीं है और कंपनियाँ आपस मे ही प्रतिस्पर्धा के रहते डिस्ट्रीब्यूटर पर ज़्यादा से ज्यादा घरेलू गैस बेचने पर जोर देती हैं |

धन्यवाद, 

भवदीय  

सुबोध अग्रवाल

प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति 2- माननीय उपराष्ट्रपति 3-माननीय प्रधानमंत्री 4- माननीय वित्तमंत्री

Saturday, 27 March 2021

वाणिज्य विभाग का वार्षिक जीएसटी रिटर्न की समीक्षा मे हस्तक्षेप/ अधिकार

माननीय वित्तमंत्री जी                                         दिनांक: 25-03-2021  

वित्त मंत्रालय नई दिल्ली

विषय: वाणिज्य विभाग का वार्षिक जीएसटी रिटर्न की समीक्षा मे हस्तक्षेप/ अधिकार

महोदया,

हमें खुशी थी यह जानकर और सोचकर कि आयकर की तर्ज पर वार्षिक जीएसटी रिटर्न की समीक्षा मे लोकल वाणिज्य विभाग का हस्तक्षेप/ अधिकार समाप्त हो जाएगा और व्यापारी को शोषण व रिश्वत खोरी से आयकर विभाग की तरह मुक्ति मिल जाएगी परन्तु जब अपने चार्टर्ड accountant से बातचीत के दौरान यह पता चला कि जौलाई 2017 के बाद के वार्षिक जीएसटी रिटर्न के केस पूर्व की ही भाँति होते रहेंगे तो कष्ट का अनुभव हुआ | मैने उनसे पूँछा था कि अप्रैल-जौलाई 2017 के केस 31-03-2021 तक खत्म करने के बाद वाणिज्य विभाग के लोग क्या करेंगे ? क्या अपने गाँव लौट जाएंगें ? बोले नहीं, “हमेशा की भाँति वार्षिक जीएसटी रिटर्न के केस करते रहेंगे और फाइल के साइज़ के हिसाब से पैसा बदस्तूर लेते रहेंगे” | वर्षों पूर्व जब मैने सेल्स टैक्स के केस कराना शुरू किए तो अपने पारिवारिक मित्र चार्टर्ड accountant से कहा कि मैं रिश्वत नहीं दूंगा, उसकी हिम्मत है तो वह एक रुपये की भी टैक्स चोरी साबित करे | यदि वह केस नहीं करता है तो मैं निबट लूँगा | पारिवारिक मित्र होने के नाते बोले “भाईसाहब आपके प्रतिष्ठान पर रोज़ छापेमारी होगी और आपको प्रताड़ित किया जाएगा, वार्षिक केस में विवेक के आधार पर कुछ भी टैक्स लगा दिया जाएगा और फिर मुझे उस सबको निपटाने के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ेगी कि मेरा दम निकल जाएगा” | उन्होंने कहा “ मैं आपके परिवार के केस में ना के बराबर फीस लेता हूँ लेकिन अब प्रति फाइल फीस ले लिया करूंगा लेकिन रिश्वत मे दी गई रकम नहीं लूँगा, अब तो आपको कोई आपत्ति नहीं है” ? मैं निरुत्तर हो गया आज तक उसी फार्मूले पर चल रहा हूँ |

धन्यवाद,

भवदीय  

सुबोध अग्रवाल

प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति    2- माननीय उपराष्ट्रपति  3-माननीय प्रधानमंत्री