Friday, 19 June 2020

श्रमिकों की रीढ़ के सहारे तेल कंपनियां


माननीय मुख्य न्यायाधीश                                                                  दिनांक :  20-06-2020
सर्वोच्च न्यायालय
नई दिल्ली
                                                                                                                                                             
 विषय: 30 kg एलपीजी गैस सिलिंडर का डिलीवरी मैन से उपभोक्ता के घर पर हैंगिंग स्केल से वज़न कराकर उसकी रीढ़ की हड्डी प्रभावित करने के सम्बन्ध में न्यायालय का विचित्र फैसला
 
महोदय,
अत्यन्त दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि अनेकों बार लिखने के बाद भी तेल कंपनियां अनावश्यक रूप से अपनी ज़िद के रहते एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर काम करने वाले ग़रीब कुपोषित मज़दूर डिलीवरी मैन से प्लांट से आये सील्ड और ऑटोमैटिक वज़न किये सिलिंडर को पुनः दो बार ( एक बार गोदाम से बाहर निकालने से पहले और फिर ग्राहक के सामने उसके घर पर ) वज़न कराने की अविवार्यता के ऊपर पुनः विचार करने से इंकार कर रहे हैं | इसके पीछे अनर्गल सुरक्षा नियम का बहाना बना रहे हैं जबकि वज़न और सुरक्षा का कोई सम्बन्ध ही नहीं है | हर रोज़ एक डिलीवरी मैन 25-30 सिलिंडर यदि डिलीवर करे तो उसको अपनी रीढ़ की हड्डी पर 50-60 बार ज़ोर डालना होता है और वह भी बिना कारण |
भारत में कोई भी सील्ड पैक्ड उत्पाद चाहे लोकली सील किया हो या इंडस्ट्री में उपभोक्ता के समक्ष पुनः तोलने की अविवार्यता नहीं है यदि ग्राहक चाहे तो तुलवा सकता है या वज़न कम होने की शिकायत सील तोड़ने से पहले कर सकता है | मेरी जानकारी में 40-45 रूपये प्रति किलो बिकने वाला एल पी जी ही अकेला प्रोडक्ट है जिसको उपभोक्ता के समक्ष तोलकर देना अनिवार्य है वर्ना 40-45 लाख रूपये प्रति किलो बिकने वाले सोने के आभूषण पर लगे हॉल मार्क को ही सही मान लिया जाता है जिसकी गुणवत्ता का सीधा सम्बन्ध माप से होता है |  अमेज़न हो या होम डिलीवरी करनेवाला दुकानदार या फिर 700-800 रूपये लीटर बिकने वाला जानसन बेबी आयल बिना सील के अपनी गुडविल पर उपभोक्ताओं को मुश्किल से ही शिकायत का मौका देते हैं | दाल हो या आंटा, तेल हो या ड्राई फ्रूट, मिठाई हो या नमकीन, नमक हो या चीनी, सीमेंट हो या पेंट सभी पर माप अंकित होता है और शायद ही कभी कम होता हो परन्तु गैस की चोरी का शक तेल कंपनियों के दिमाग से बाहर नहीं आ पा रहा है जबकि स्वयं 50-60 साल में वह एक ऐसी सील तैयार नहीं कर सके जिस पर खुद विश्वास कर सकें| इसके उलट पूरी व्यवस्था  ग़रीब कुपोषित मज़दूर डिलीवरी मैन की रीढ़ की हड्डी के सहारे चला रहे हैं |
कई बार वह न्यायालय के आदेश का हवाला देते हैं जो कि उपभोक्ता नियम के प्रतिकूल है जिसमे किसी खास उत्पाद को कोई विशेष दर्जा देना न्याय संगत नहीं हो सकता | न्यायालय में आयल कंपनियों ने अपना पक्ष रखने की आवश्यकता ही नहीं समझी क्योंकि उन्हें तो वाताकूलित कमरों का आराम मय्यसर है | न्यायालयों में फैसले देने में कितनी संजीदगी दिखाई जाती है इसके उदाहरण वर्षों की सुनवाई के बाद दिए गए फैसलों के उलट पलट होने से समझी जा सकती है |
भवदीय,

सुबोध कुमार अग्रवाल                                                                     
 307 पुरानी आवास विकास कॉलोनी
 सिविल लाइन्स रामपुर उ. प्र. 244901
मोबाइल: 9837100538         
प्रतिलिपि:1- माननीय राष्ट्रपति                                                            2- माननीय उपराष्ट्रपति
               3- माननीय अध्यक्ष लोकसभा                                               4- माननीय प्रधान मंत्री
               5- माननीय मंत्री पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय   6- माननीय मंत्री स्वास्थ्य मंत्रालय
               7- माननीय मंत्री   श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय
 


No comments:

Post a Comment