Friday, 29 June 2018

शिक्षा



हमें नर्सरी से लेकर उच्च शिक्षा के स्तर व ज़रूरतों को समझना होगा | आज सोशल मीडिया पर हासिल जानकारियों को देखते हुए इतिहास, भूगोल के chapter कम करने की आवश्यकता है | साइंस, गणित, एकाउंट्स, साहित्य, आर्ट को ख़त्म नहीं किया जा सकता | बच्चों पर बोझ कम करने की आवश्यकता है कुछ तो कटोती करनी पड़ेगी | creativity और practical training, safety आदि के साथ भारतीय सभ्यता और अनुशासन, सफाई, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना भी आवश्यक है | Rules of the road, disaster management आदि की जानकारी अति आवश्यक है | आज हमें T.V. पर बेहिसाब विज्ञापन देने पड़ते हैं जो कुछ लोग ही सुनते देखते हैं, पके दिमाग पर इनका असर भी नहीं होता | नन्हे बच्चे के कच्चे दिमाग पर जो भी पढाया जाएगा, असर होगा | सड़कों पर जाम अनुशासनहीनता और जानकारी की कमी व penalty ना होने की वजह से लगते हैं जो समूचे देश की productivity कम करते हैं और irritation पैदा करते हैं | safety, disaster management, Indian culture के कोर्स पहले क्लास से लेकर उच्च शिक्षा ( डाक्टरी, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, साइंस, C.A. ) तक किसी ना किसी रूप में शामिल किये जाएँ |
बच्चों को नर्सरी से ही बागवानी, खेती, सुरक्षा बढई गिरी, लोहार गिरी, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि की प्रैक्टिकल जानकारी खेल खेल में दी जानी चाहिए |
आप विभिन्न देशों के शिक्षा के तरीकों को देखेंगें तो पाएंगे जापान में 10th standard तक बच्चा इंडस्ट्री में काम करने के लिए तैयार हो जाता है | ग्रेजुएशन सभी नहीं करते और ऊपर इतनी भीड़ भी नहीं होती और नौकरी न मिलने का मलाल भी नहीं होता | वहां ओवर टाइम मिला कर worker और manager की salary में बहुत बड़ा फर्क नहीं होता |
उच्च शिक्षा का स्तर हमारे यहाँ बहुत नीचे है | IIT में भी मेरा अनुभव अच्छा नहीं है| 1979 में रुड़की से mechanical इंजीनियरिंग पढकर और फिर बच्चों द्वारा उसी IIT रुड़की से 2009 और 2013 इंजीनियरिंग करने का अनुभव बताता है कि हमारी दिशा और दृष्टि अभी भी सही नहीं है | दोनों बच्चों द्वारा अमेरिका के सबसे अच्छी यूनिवर्सिटी से कोर फील्ड में पोस्ट ग्रेजुएशन करने पर ही लगा कि उन्होंने बहुत knowledge gain की है | हमारे यहाँ सिर्फ डिग्री बाटी जा रही हैं | यहाँ IIT से पोस्ट ग्रेजुएशन से भी विशेष हासिल नहीं होता | जितनी मेहनत वहां पोस्ट ग्रेजुएशन में करनी पड़ती है वह तो अब मै समझ सकता हूँ |

Saturday, 2 June 2018

क्या भारत में किसी को हड़ताल करने का अधिकार ?



आपको नौकरी मिली है सरकारी या प्राइवेट, कारोबार हो या प्रोफेशन | खाने कमाने का साधन और अधिकतर केस में पेंशन और स्वास्थ्य सुविधा मिली हैं | उसका क्या जो सारी उम्र मजदूरी करते करते 50-55 की उम्र के बाद इस लायक भी नहीं रह जाता | सभी का प्राकृतिक संसाधनों पर बराबर का अधिकार है लेकिन जो जितना ज़्यादा सक्षम है उतना ज्यादा उपभोग कर रहा है, हवा हो या पानी, खेती हो या मिनरल्स | हवाई जहाज से लेकर ट्रेन कार बस कपड़ा खाना घर होटल सड़क पहाड़ नदी सागर इत्यादि इत्यादि | हर व्यक्ति और संगठन अपनी तुलना अपने से ज्यादा बईमानी से कर रहा है | बैंक कर्मी कहता है एक दिन के MLA / MP को पेंशन क्या सभी सुविधाएं मिलती हैं, हम क्यों नहीं अपने अधिकार के लिए लडें | अरे भाई उनसे अपने आप की तुलना क्यों करते हो? राजनैतिज्ञ तो अपने सीने और पीठ पर “ हम बईमान “ का ठप्पा लगाए बेशर्मी से घूमते हैं | अपने आप को क्यों नहीं उस व्यक्ति से compare करते जो आपके साथ लाइन में खड़ा था लेकिन आपका नम्बर आ गया और वह रह गया, इसलिए नहीं कि आप ज्यादा काबिल थे ? हो सकता है आप ज़्यादा काबिल हो भी तो क्या वह सिर्फ आपकी कमाई है या प्रकृति द्वारा आपको दिया गया अच्छा दिमाग और परिश्रम करने की क्षमता ? धन्यवाद करें प्रकृति और समाज का |
अपने अधिकार की लड़ाई लड़ना कोई गलत बात नहीं लेकिन बग़ैर उस समाज का नुकसान पहुंचाए जिसके आप ऋणी हो | सीखिए उन महाराष्ट्र के किसानो से जिन्होंने भारत में ही लाखों कि संख्या में प्रदर्शन किया, ना सिर्फ अनुशासन में रहकर बल्कि समाज और देश का विश्वास व प्यार जीतकर| भ्रान्ति है कि अपने अधिकार के लिए हड़ताल एक ही रास्ता है | दूसरों को कष्ट देने की जगह खुद को कष्ट दीजिये यदि अधिकार की लड़ाई लड़नी है |