Saturday, 28 July 2018

हमारे अस्पतालों में धांधली



हमारे अस्पतालों में क्या आपको उपभोक्ता सूची दिखाई देती है यानि अलग अलग इलाज के खर्चे का विवरण, रूम charges आदि जबकि सब कुछ उनके पास फाइलों में मोजूद है | यदि आपका मेडिकल insurance है तो वह estimate बनाकर TPA को भेजते हैं जो वास्तविक से बहुत ज़्यादा होता है | आपको बाद में पता चलता है कि आप Rs 2000/- प्रतिदिन बेड के entitle हैं और estimate Rs 3000/- प्रतिदिन के बेड का बना है अतः आपके पूरे बिल को prorata basis पर पास किया गया है | आपको Rs 3000/- का कमरा दिया गया है | ना तो डॉक्टर और ना ही TPA आपको पहले बताता है | prorata क्यों है इसका जवाब होता है कि ज्यादा पैसे के रूम पर doctor visit, laboratory investigation, opreation theater के charges भी उसी ratio में होते हैं जबकि वही doctor, laboratory, opreation theater होता है और कोई भी extra facility महंगे रूम लेने पर या सस्ते रूम पर कम provide नहीं की जाती | रूम facility से doctor, laboratory, opreation theater का कोई लेना देना नही होता | मरीज के अभिवावक doctor से ज्यादा बहस इस मुद्दे पर कहीं कर पाते और अस्पताल की कोशिश होती है कि आपको ज्यादा से ज्यादा अँधेरे में रखे | फाइनल बिल दोपहर के बाद ही भेजा जाता है चाहे डॉक्टर सुबह 9 बजे आपको डिस्चार्ज के लिए कह दे | यह बिल आधी रात या सुबह आधा अधूरा पास होगा ताकि आप को वहां एक रात और रुकना पड़े | TPA और अस्पताल आपके entitlement के बारे में इलाज से पहले सूचना नहीं देंते हैं | यदि आप बगैर insurance के इलाज कराएँगे तो वह इससे आधे में उसी अस्पताल और उसी सुविधा में होगा, यानि सारी कटोती के बाद insurance प्रीमियम भरकर भी आप 10-15% ही बचा पाते हो और अस्पताल चांदी काट रहे हैं और सरकार चुपचाप इस खेल को देख रही है | आपके insurance प्रीमियम का ज़्यादातर फायदा अस्पतालों को मिल रहा है | TPA और insurance कंपनी ऐसा खेल क्यों कर करा रहीं हैं कहना मुश्किल है | एक बार कैश pay करने के बाद आप सालों साल अपने ज़िम में एक परेशानी TPA के साथ follow up की पाल लेते हो और यह अदालत तक आप को ले जाती है | मेरे अपने भाइयों के परिवार के ऐसे तीन केस हैं और मै अपनी जिद के कारण इनको छोड़ नहीं रहा हूँ | Insurance company RTI में उलटे सीधे जवाब देकर छुटकारा पाना चाहतीं हैं |

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