Monday, 6 July 2020

शिक्षा के नए प्रारूप की आवश्यकता


सेवा में,                                                                                     दिनांक: 06-07-2020
माननीय मंत्री
मानव संसाधन मंत्रालय
नई दिल्ली

विषय: शिक्षा के नए प्रारूप की आवश्यकता
महोदय,
1-     क्या आप नौकरी के लिए 8वीं पास या 5वीं फेल व्यक्ति की क़ाबलियत में कोई विशेष फर्क महसूस करते हो या आपके मस्तिष्क पर इस बात का प्रभाव पड़ता है कि यह 8वीं पास है इसे रख लेता हूँ यह 5वीं फेल व्यक्ति से बेहतर होगा ? यदि नहीं तो 8वीं कक्षा तक उसे  फेल करने की आवश्यकता ही क्या है | समय समय पर अनौपचरिक टेस्ट लेकर ग्रेडिंग सिस्टम  अपनाएँ | हरेक कक्षा में सर्टिफिकेट पर ग्रेड दे दें A B C D E F ताकि माता पिता और अगली कक्षा के अध्यापक बच्चे की रूचि जान सकें | सभी बच्चों को एक जैसे ही विषय पढ़ाने की क्या आवश्यकता है | किन्ही 5-6 विषयों जिसमे ड्रामा संगीत स्पोर्ट्स आदि भी शामिल हों ग्रेड दे दे | 8वीं कक्षा तक रिपीट कराने का क्या लाभ होगा ? कक्षा 10 तक शिक्षा अनिवार्य कर दी जाएगी | 10वीं कक्षा में परीक्षा के बाद ग्रेड दे दें A B C D E F | एक या दो चांस ग्रेड इम्प्रूव करने के लिए दे दें | जापान में 10वीं कक्षा तक आईटीआई की तरह की ट्रेनिंग कोर्स में शामिल है ताकि वह इंडस्ट्री में काम करने लायक हो जाये | उसके आगे की पढ़ाई के लिए उसे परीक्षाओं में पास होने की आवश्यकता हो |
2-     नदी की धारा को बदलने या बाँधने की आवश्यकता क्यों होनी चाहिए ? क्यों नहीं एक नन्हे मुन्ने बच्चे को इस बात की छूट होनी चाहिए कि वह किस विषय को जाने और किस विषय को नहीं, किस कक्षा में बैठे और किस कक्षा में नहीं ? रामानुजम और रविंद्रनाथ टैगोर को इतिहास भूगोल पढ़ने की आवश्यकता क्यों होनी चाहिए | क्या दूसरों को ज़िंदगी को अच्छी तरह जीने के लिए गणित और साहित्य आवश्यक हैं ? नर्सरी से 5वीं कक्षा तक तो बच्चे को आज़ाद छोड़े कि वह किस क्लास में बैठे और किस में खेलने चला जाये | आप भाषा, गणित के साथ साथ पेंटिंग, हेंडीक्राफ्ट, स्पोर्ट्स, संगीत, नृत्य,  ड्रामा, कृषि, धातु, मिश्र धातु, रसायन, अंतरिक्ष, बिजली, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि के बारे में जानकारी दें जिनके बारे में बच्चों की जिज्ञासा बनी रहती है और उनके उत्तर उनको अपने माता पिता से अक्सर नहीं मिल पाते | उसकी रूचि का धीरे धीरे पता चल जाएगा|
3-     आक्रणकारी बाबर और क्रूर औरंज़ेब को पढ़ाने का क्या औचित्य है ? शिवाजी महाराणा प्रताप की वीर कथाएं पढाई जाएँ | कबीर, सूरदास, तुलसीदास, रसखान पता नहीं अब कितने और कहाँ पढ़ाये जाते हैं ? पौराणिक कथाओं के सच या झूंठ होने के विचार को त्याग कर उसमें छुपे अनंत ज्ञान भण्डार और जीवन यापन करने की अद्भुत प्रेरणा से बच्चों अवगत कराएं | हिंदू संस्कृति और भारतीय सभ्यता को भूलने से विकास का मार्ग नहीं मिलेगा | गणित विज्ञान और चिकित्सा से लेकर अंतरिक्ष तक के उत्तर हमारी संस्कृति और सभ्यता में निहित हैं | उनको आगे बढ़ाने की आवश्यकता है | योग और व्यायाम के साथ साथ प्राकृतिक आपदाओं के सम्बन्ध में ज्ञान वर्धन आवश्यक है |
4-     वास्तुकला के धनी सैकड़ों हिंदू, जैन, बौद्ध मंदिरों, गुरुद्वारों, चर्चों, मस्जिदों आदि के बारे में जानकारी दी जाये | क़ुतुब मीनार, लाल किले व ताज महल में ऐसा क्या है जो दूसरों वास्तुकला के धनी पुरातत्व विभाग के द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों में नहीं ?
      भवदीय,

सुबोध कुमार अग्रवाल                                                                     
307 पुरानी आवास विकास कॉलोनी
सिविल लाइन्स रामपुर उ. प्र. 244901
 मोबाइल: 9837100538

प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति                                                 2- माननीय उपराष्ट्रपति
                    3- माननीय अध्यक्ष लोकसभा                                  4- माननीय प्रधान मंत्री

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