सेवा में,
दिनांक: 20-07-2020
मुख्य चुनाव आयुक्त
भारत निर्वाचन आयोग
निर्वाचन सदन, अशोक रोड
नई दिल्ली
110001
विषय: चुनाव
प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता
महोदय,
भारत निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया सुधार में महत्त्व पूर्ण भूमिका निभा सकता है, जैसे कि शेषन जी ने वर्षों पूर्व
संविधान के तहद और उसी व्यवस्था के रहते ऐतिहासिक कदम उठाया और सभी लोग कुछ ना नुकर के बाद मानने को बाध्य हुए |
संविधान में कहाँ से क्या बिन्दु उठाकर लाना है इसे सिविल सेवा के
अधिकारी बखूबी जानते हैं | मैं कुछ बिंदुओं
पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा |
1-
चुनाव आयोग को अब उनके
द्वारा सभी राजनैतिक प्रत्याशियों और पार्टियों को हर शहर और कस्बे में अनेक मंच
बिना पैसा लिए लाटरी सिस्टम से उपलब्ध करा देना चाहिए | वहां कुछ धन विज्ञापन के
जरिये उगाहाना चाहिए और सरकार से अपने लिए फण्ड बढाने की मांग करनी चाहिए |
इलेक्शन के लिए अन्य सामिग्री एक जैसी प्रिंट करायें और प्रत्याशियों से पैसा लेकर दें |
प्रत्याशियों के खर्चे की सीमा कम कराने को सरकार से अनुरोध करें |
2-
जुलूस और लाउड स्पीकर सभा
स्थल के अलावा प्रतिबंधित हों | मंच, कुर्सी, दरी इत्यादि पहले दिन से आखिरी दिन
तक उपलब्ध हो | सभी अखवारों और टी.वी. में चुनाव आयोग प्रत्याशियों की लिस्ट जारी
करें | चुनाव आयोग को अखवारों और
टी. वी. पर विज्ञापन की मुफ़्त सुविधा हो क्योंकि अखवारों और टी. वी. को सरकार की ओर से पहले ही अनेकों सुविधाएँ मिलती है | दीवारों आदि पर पोस्टर
प्रतिबंधित हों | चुनाव आयोग पोलिंग बूथ पर
बाहर कई दिन पहले ही बैनर लगाकर प्रत्याशियों
की लिस्ट जारी करें | इसमें कुछ पैसा विज्ञापन से अर्जित किया जा सकता है | टी.वी.
पर प्रत्याशियों की बहस के लिए टी.वी. से पैसा वसूल करें | यदि आवश्यक हो तो सरकार
से बिल पास कराने का अनुरोध करें ताकि सरकारी पैसे की बचत हो | टी. वी. चैनल से
बहस का पैसा लेना अजीब लग सकता है लेकिन कुछ समय बाद यह ठीक लगने लगेगा जब सरकार
बिल पास करा लेगी |
3-
वाहन अधिग्रहण करने की जगह
खुले बाज़ार से बाज़ार भाव पर विज्ञापन कर इलेक्शन टीम के लिए वाहन लें ताकि उनकी
प्रतिष्ठा बनी रहे और व्यापारी वर्ग के साथ न्याय हो सके | आज के समय जबरदस्ती गाड़ी लेना उचित नहीं | एक दिन के नाम पर
कई दिन गाड़ी चुनाव आयोग के कब्ज़े में रहती है और मुश्किल से ही महीनों बाद ना के
बराबर एक दिन का पैसा मिलता है |
4-
राजनैतिक पार्टियों को एक
रुपया भी कैश में लेने का अधिकार क्यों हो जबकि गोलगप्पे भी कैशलेस प्रक्रिया से
खाने की बात हो रही हो | जब सरकार कहती है सबके बैंक एकाउंट खुल गए हैं और यदि नही
तो वह चन्दा देने से पहले खुलवा ले | स्रोत 100% पारदर्शी क्यों नहीं? बांड का गड़बड़ घोटाला क्यों ? वैसे प्रत्याशियों या
राजनैतिक पार्टियों को बड़े बड़े फण्ड की आवश्यकता क्यों हो और वह भी कोविड 19 के तजुर्बे के बाद | हम सब समझ चुके हैं कि अपनी बात दूर रहकर भी कही जा सकती है | सड़के और रास्ते बंद कर आम जनता को परेशान करने का कोई औचित्य नहीं | बिना रैली किये देश के हर व्यक्ति के पास कोविड 19 का सन्देश पहुँच गया | हमारे देश में बहुत से त्यौहार उत्सव मनाएं जाते हैं चुनाव उत्सव की आवश्यकता
नहीं |
5-
इलेक्शन के लिए राजनैतिक
पार्टियों या प्रत्याशियों को सरकारी funding का कोई भी औचित्य समझ नहीं आता है |
क्या संविधान में इलेक्शन लड़ना ही अकेला संवैधानिक अधिकार है, चाहे आप अंगूठा छाप
हो या जेल में ? जब टैक्स के पैसे को राजनैतिक पार्टियों या प्रत्याशियों को
सरकारी funding की बात होती है तो फिर कल कोई व्यक्ति कह सकता है कि मुझे शिक्षा और
व्यवसाय के लिए लोन दो वह भी बगैर ब्याज के और ब्याज क्यों, मै तो मूलधन भी वापिस
नहीं करूंगा | नहीं तो भ्रष्टाचार करूंगा जैसे कि राजनैतिक दल और बुद्धिजीवी रोज़
दलील देते हैं ?
6-
इलेक्शन के लिए क्या सचमुच
में पैसा चाहिए, वह भी आज के इलेक्ट्रोनिक युग में जब पलक झपकते ही सन्देश एक
स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच
जाता है | क्या प्रत्याशियों के लिए मतदाता को चिल्ला चिल्ला कर बताना होगा कि मै
भी खड़ा हूँ ? क्या मतदाता इतना बेखबर है ? यदि हाँ तो क्या आप ऐसे मतदाता को
खबरदार कर सकते हो ? प्रशासनिक
अधिकारी स्कूल के बच्चों की रैली निकलवाते हैं कि वोट डालें | व्यापारिक
प्रतिष्ठानों के खर्चे पर ज़ोर ज़बरदस्ती कर प्रतिष्ठानों व उनकी गाड़ियों पर बैनर
लगवाते हैं | क्या इसकी कोई आवश्यकता है ? क्या मतदाता को खबर नहीं
कि पूरे शहर/ गॉव में छुट्टी क्यों है ? मैं कई वर्षों से अपने मित्रों और सम्बन्धियों को चुनौती
देता हूँ कि वह किसी ऐसे व्यक्ति का नाम बताएं जो पोलिंग के दिन वहाँ मौजूद रहते
वोट डालने में सक्षम होते हुए भी वोट ना डाल रहा हो ? यह तो अब मुहाबरा भर ही रह गया है कि लोग वोट
डालने नहीं जाते, ड्राइंग रूम में
बैठे बात करते हैं |
7-
प्रश्न यह है कि
पोलिंग परसेंटेज कम क्यों है ? इसका उत्तर उसके निम्न कारणों पर विचार करने से मिल जायेगा |
(a)
मेरे खानदान के 14 परिवार रामपुर
में रहते हैं जिन्होंने अपने खानदानी मूल घर से शहर में अन्य स्थान पर शिफ्ट कर
लिया है | करीब 50 वयस्कों के 75 वोट बने हुए हैं यानि 25
के करीब पुराने पते पर
बने वोट हैं जो प्रयत्न करने पर भी कैंसिल नहीं हो रहे हैं | 50 वोट में से लगभग 25 वोट ही मुश्किल
से डल पाते हैं क्योंकि वच्चे बाहर अन्य शहरों में हैं | मैने स्वयं 40 वर्ष की आयु में
पहली बार वोट डाला जब अपने शहर रामपुर आया | दूसरे शहर में
बहुत कोशिश के बाद भी वोट बनवा नहीं पाया या फिर जब तक बना मैं वह शहर छोड़ चुका था |
(b)
पोलिंग बूथ में
जाने में असमर्थ वृद्ध व्यक्ति, घर में मृत्यु के कारण या अस्पताल में दाखिल या ट्रैन/ बस
में सफ़र कर रहे या दूसरे शहर में न्यायालय की तारीख की वजह से वोट ना डाल पाने का
विकल्प नहीं है | भारत में शादियों के लिए
कई महीनों पहले मंडप और ट्रेन/ हवाई जहाज के टिकट बुक कर लिए जाते हैं जबकि पोलिंग
की तारीख 1-2 महीने पहले ही आती है |
चुनाव आयोग तीन तीन अलग बनी लिस्टों पर काम
करता है | लोक सभा, विधान सभा और
नगरपालिका/पंचायत लिस्ट | सरल उपाय भी हम
सभी जानते हैं सिवाय चुनाव आयोग के | आज के डिजिटल युग
में जब लगभग सभी को आधार मिल चुका है बैंक अकाउंट खुल गया है, जो जहाँ है वहीं
से वोट भी डाल सकता है,
आपको अनेकों सुझाव मिल
जायेंगे जो शायद आप पहले से ही जानते होंगे | आवश्यकता है शेषन जी के पद चिन्हों पर चल इच्छा
शक्ति दिखाने की |
भवदीय
सुबोध कुमार अग्रवाल
307 पुरानी आवास विकास कॉलोनी
सिविल लाइन्स रामपुर उ. प्र. 244901 मोबाइल: 9837100538
प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति 2- मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय
3- माननीय उपराष्ट्रपति 4- माननीय अध्यक्ष लोकसभा
5- माननीय प्रधान मंत्री 6- माननीय कानून और न्याय मंत्री
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