Friday, 24 July 2020

रेलवे तत्काल की तर्ज पर न्यायालयों में ज़्यादा पैसे लेकर तत्काल सुनवाई


कृपया youtube वीडियो  "अपना अपना सोच" पर भी मेरे विचार जाने | यह पत्र सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Grievance Management 30558/SCI/PIL (E)/2019 में रजिस्टर्ड |
सेवा में,                                                                                                    दिनांक: 11-06-2020
माननीय मुख्य न्यायाधीश
सर्वोच्च न्यायालय
नई दिल्ली                                                                                                                         
विषय: रेलवे तत्काल की तर्ज पर न्यायालयों में ज़्यादा पैसे लेकर तत्काल सुनवाई
महोदय,
रेलवे तत्काल की तर्ज पर न्यायालयों में ज़्यादा पैसे लेकर तत्काल सुनवाई के विचार को बिना बहस के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा | जैसे रेलवे में बिना किसी के अधिकार को छीने या छीनकर तत्काल लागू किया गया और उसके अच्छे परिणाम देखने को मिले वैसे ही इस पर बहस होनी चाहिए | वैसे भी सक्षम और अक्षम की लड़ाई प्रकृति अधीन छोड़ देना बेहतर होगा | प्रकृति के न्याय को कोई चैलेंज नहीं कर सकता | एक को दिव्यांग ग़रीब परिवार में तो दूसरे को सर्वगुण संपन्न राजा के यहाँ पैदा करती है | आप चाहकर भी यह असमानता नहीं मिटा सकते | आप उसके लिए बेहतर अवसर पैदा तब कर सकते हैं जब सक्षम से अधिक धन वसूलें और अक्षम के काम में लाएं | सक्षम बदले में बेहतर सर्विस चाहेगा | उसके लिए इसी व्यवस्था में रेलवे तत्काल की तर्ज पर दिन में पहले और समय बद्ध सीमा में न्याय  उपलब्ध कराएं |
भारत में योग्य और शिक्षित बेरोजगारों की कमी नहीं है | लोग ज़्यादा पैसा खर्च करने को भी तैयार हैं यदि समय और तबालत बचे | वैसे भी अदालतों में तारीख़ पर तारीख़ के चक्कर में कोई कम पैसा खर्च नहीं होता | स्टार्टअप वाले युवा आजकल घंटे के हिसाब से furnished ऑफिस किराए पर लेते हैं और आप के पास तो पहले ही इंफ़्रा स्ट्रक्चर तैयार है | आपके जज दो घंटे से ज़्यादा काम करने का बहाना बनाते हैं बनाने दीजिये बाकी समय उसी ऑफिस में दूसरे जज को बैठा दें | दिन में 8 घंटे की जगह 16 घंटे काम होने दें | महीने में 20 दिन की जगह 30 दिन काम होने दें | आज तो लोग work from home करते हैं | आज भी सभी ऑफिस में फाइल घर पर पढ़ने के लिए ले जाने का अभ्यास है | ज़्यादातर वकील तो वैसे भी मारे मारे फिर रहे हैं और तारीख़ लगवा कर ही गुज़ारा कर रहे हैं | अलग-अलग समय में अलग-अलग कोर्ट फीस और वकीलों की फीस स्तर के हिसाब से फिक्स कर दीजिये | दो साल में पुराने सारे केस निबट जायेंगें और तब शुरू होगी बहुत से नए केस आने की प्रक्रिया जो लोग आज न्यायालय जाने की हिम्मत नहीं करते, वह भी आने लगेंगें |

भवदीय,

सुबोध कुमार अग्रवाल                                                                     
307 पुरानी आवास विकास कॉलोनी
सिविल लाइन्स रामपुर उ. प्र. 244901
मोबाइल: 9837100538
 प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति भारत सरकार                       2- माननीय उपराष्ट्रपति भारत सरकार
                    3- माननीय अध्यक्ष लोकसभा                                 4- माननीय प्रधान मंत्री भारत सरकार
                    5- माननीय कानून और न्याय मंत्री

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