उदय भास्कर जी दैनिक जागरण दिनांक 12-04-2019 में
प्रकाशित लेख में सभी ठीक है परन्तु एक बात पर विचार अवश्य करें, उससे पहले मै
आपको बताना चाहूंगा कि अपने आप को आस्तिक कहने वाले कुछ लोग मुझ जैसे को नास्तिक
कहते हैं लेकिन मुझे हिन्दू संस्कृति और भारतीय सभ्यता प्रिय है जिसका नाश
सुनुयोजित तरीके से मुस्लिम नवाबों और अक्रांताओं, ब्रिटिशर्स और अंत में कांग्रेस
व अपने आपको सेक्युलर कहने वाले लोगों ने किया | क्या नक्सलवाद में हिन्दू धर्म को
बढ़ावा देने वाली कोई बात कभी सामने आयी है या फिर कभी भी तमिल टाइगर फ़ौज ने हिन्दू
धर्म की बात की ? गांधी जी की हत्या में एक व्यक्ति शामिल था ना कि एक संस्था और
ना ही उस व्यक्ति ने हिन्दू धर्म को बढ़ावा देने के लिए गांधी जी की हत्या की | अगर
समझौता एक्सप्रेस में किसी हिन्दू संगठन का हाथ होने की बात भी स्वीकार कर भी ली
जाये तो क्या यह हिन्दू धर्म को आगे बढ़ाने के लिए आतंकवाद था ?
सभी स्वयं को बुध्धिजीवी और सेक्युलर कहने वालों
की समस्या यह है कि वह सच्चाई से भागना चाहते हैं | विषयों को भटकाना चाहते हैं |
क्यों नहीं आप इस्लामिक आतंकवाद पर लिख पाते जो अल्लाह हो अकबर के नारे ही नहीं
लगाते बल्कि सारी दुनिया को इस्लाम के रंग में रंग देने का दंभ भरते हैं ? क्यों
नहीं धर्म को बढ़ावा देने वाले कश्मीरियों के ऊपर बोल पाते जिन्होंने जबरन इस्लाम
कबूल कराया, हत्या की और एक हिन्दू राज्य कुछ शताब्दियों में मुस्लिम बहुल बन गया
| जिनकी वजह से कश्मीरी पंडितों को अपने ही देश में शरणार्थियों की तरह रहना पड़
रहा है | आज हम हिन्दू मुसलमान दोनों ही की भारतीय नागरिक होने की बात तो करते हैं
लेकिन अन्य विषयों पर आँखें मूँद लेते हैं |
धर्मान्तरण की दलीलों को हम इतनी सहजता से
स्वीकार कर लेते हैं कि लगता है कि विश्व के सभी धर्मों में इस्लाम और इसाई धर्म सर्वश्रेष्ठ
हैं और इसीलिये लोग पिछली शताब्दियों में उनकी ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रह सके |
मुस्लिम नवाब, अक्रांता और पादरी तो बस चने ही भूनते रहे | भारत वर्ष जो हिन्दू परम्पराओं
ओर मान्य्ताओं से ईरान से बर्मा तक फैला था आज सिकुड़ कर यहाँ आ पहुंचा है | 2500
साल पहले का बौध्ध धर्म जो हिन्दू संस्कृति और पद्धिति के इतना क़रीब है उसका
आकर्षण तो समझ आता है और कोई बालात धर्मान्तरण की घटनाएं इतिहास में दर्ज नहीं हैं
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