माननीय वित्तमंत्री जी दिनांक: 25-03-2021
वित्त मंत्रालय नई दिल्ली
विषय: वाणिज्य विभाग का वार्षिक जीएसटी रिटर्न की समीक्षा मे हस्तक्षेप/ अधिकार
महोदया,
हमें खुशी थी यह जानकर और सोचकर कि आयकर की तर्ज पर वार्षिक जीएसटी रिटर्न की समीक्षा मे लोकल वाणिज्य विभाग का हस्तक्षेप/ अधिकार समाप्त हो जाएगा और व्यापारी को शोषण व रिश्वत खोरी से आयकर विभाग की तरह मुक्ति मिल जाएगी परन्तु जब अपने चार्टर्ड accountant से बातचीत के दौरान यह पता चला कि जौलाई 2017 के बाद के वार्षिक जीएसटी रिटर्न के केस पूर्व की ही भाँति होते रहेंगे तो कष्ट का अनुभव हुआ | मैने उनसे पूँछा था कि अप्रैल-जौलाई 2017 के केस 31-03-2021 तक खत्म करने के बाद वाणिज्य विभाग के लोग क्या करेंगे ? क्या अपने गाँव लौट जाएंगें ? बोले नहीं, “हमेशा की भाँति वार्षिक जीएसटी रिटर्न के केस करते रहेंगे और फाइल के साइज़ के हिसाब से पैसा बदस्तूर लेते रहेंगे” | वर्षों पूर्व जब मैने सेल्स टैक्स के केस कराना शुरू किए तो अपने पारिवारिक मित्र चार्टर्ड accountant से कहा कि मैं रिश्वत नहीं दूंगा, उसकी हिम्मत है तो वह एक रुपये की भी टैक्स चोरी साबित करे | यदि वह केस नहीं करता है तो मैं निबट लूँगा | पारिवारिक मित्र होने के नाते बोले “भाईसाहब आपके प्रतिष्ठान पर रोज़ छापेमारी होगी और आपको प्रताड़ित किया जाएगा, वार्षिक केस में विवेक के आधार पर कुछ भी टैक्स लगा दिया जाएगा और फिर मुझे उस सबको निपटाने के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ेगी कि मेरा दम निकल जाएगा” | उन्होंने कहा “ मैं आपके परिवार के केस में ना के बराबर फीस लेता हूँ लेकिन अब प्रति फाइल फीस ले लिया करूंगा लेकिन रिश्वत मे दी गई रकम नहीं लूँगा, अब तो आपको कोई आपत्ति नहीं है” ? मैं निरुत्तर हो गया आज तक उसी फार्मूले पर चल रहा हूँ |
धन्यवाद,
भवदीय
सुबोध अग्रवाल
प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति 2- माननीय उपराष्ट्रपति 3-माननीय प्रधानमंत्री
No comments:
Post a Comment