Monday, 29 March 2021

सरकारी तेल कंपनियों की मुनाफाखोरी और दिखावा

 

सेवा में,                                                          दिनांक: 09-03-2021

माननीय मंत्री जी

पट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय  

शास्त्री भवन नई दिल्ली

 महोदय,

देश सबसे बड़ी कंपनियों को कब तक पुराने सिस्टम को ढोते रहना चाहिए ? क्यों नहीं दुनिया की सबसे बड़ी डिस्ट्रब्यूशन कंपनी Amazon के डिस्ट्रब्यूशन नेटवर्क से सीखना चाहिए | तीनों सरकारी कंपनियाँ आपस मे ही प्रतिस्पर्धा करती हैं और जनता के पैसे को विज्ञापन और दिखावे पर खर्च करती हैं | टी वी और अखवार मे भी विज्ञापन देतीं हैं सब जनता के पैसे पर | तीनों कंपनियाँ एक ही रेट और सेवा सिस्टम अपनाती हैं तो प्रतिस्पर्धा कैसी ? क्या Amazon का कोई शोरूम या विज्ञापन देखा है ? तीनों कंपनियाँ गैस डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए 3x4 m की दुकान की आवश्यकता के लिए विज्ञापन देतीं हैं और फिर बाद मे प्राइम लोकेशन पर बड़े बड़े शोरूम बनाने का दवाब डालती हैं | डिस्ट्रीब्यूटर से भी से भी इसी तरह काफी धन खर्च करातीं हैं जिसका बोझ तो जनता पर ही पड़ता है | क्या आपने Amazon का लोगो लगा वाहन या delivery boy देखा है ?

अब जबकि प्रधानमंत्री जी और सरकार डिजिटल की बात करती है तो बहुत ही सरल सिस्टम अपनाया जा सकता है जिससे डिस्ट्रब्यूशन का खर्च भी कम होगा और smoothness भी आएगी | सेल्स ऑफिसर को भी गोदाम या शोरूम पर ऑडिट करने के लिए हर तीसरे माह नहीं आना पड़ेगा | आकस्मिक निरीक्षण और आपूर्ति विभाग का शोषण भी समाप्त हो जाएगा | कागज पैन की आवश्यकता भी नहीं रहेगी | हरेक सिलिन्डर पर फिलहाल सिर्फ बार कोड/ QR कोड लगाकर प्रक्रिया की शुरूवात करें | प्लांट से निकले हर सिलिन्डर की पूरी डिटेल प्लांट से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर और अंत मे ग्राहक के पास भी उपलब्ध होगी | Delivery man मोबाईल से स्कैन कर एप पर transfer करेगा | delivery man सील चैक कराएं और सुरक्षा ने नियम समझाए | Amazon कैश और on-line पेमेंट दोनों लेता है | बुकिंग से लेकर delivery और शिकायत सभी मोबाईल पर | Amazon का विश्वास देखिए बिना ना नुकर के सामान वापिस लेता है वजह चाहे कुछ भी हो |  

बिना सब्सिडी वाली घरेलू गैस आज रु 60 प्रति किलो और व्यावसायिक रु 87.25 प्रति किलो | जीएसटी  घरेलू पर 5% और व्यावसायिक पर 18% यानि व्यावसायिक गैस का रेट रु 67.50 प्रति किलो होना चाहिए | घरेलू और व्यावसायिक गैस की गुणवत्ता और composition मे कोई फ़र्क नहीं होता और इसको भरने व डिस्ट्रब्यूशन करने मे कोई अलग से खर्च नहीं होता है फिर भी कंपनियाँ इस पर करीब रु 20 प्रति किलो जोकि करीब 30% बनता है प्रीमियम चार्ज करती हैं जिसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ता है | आज की तारीख मे कंपनियाँ रु 18 प्रति सिलिन्डर सब्सिडी देती हैं और उससे कहीं ज़्यादा सरकार से लेती हैं | कंपनियाँ पेट्रोल या डीज़ल पर कोई सब्सिडी नहीं देती हैं | घरेलू सिलिन्डर पर सब कुछ बाज़ार हिसाब से है तो फिर सरकारी कंपनियों द्वारा व्यावसायिक सिलिन्डर पर प्रीमियम लेकर जनता का शोषण क्यों | इस कारण असामाजिक तत्व घरेलू सिलिन्डर से व्यावसायिक सिलिन्डर भरकर मुनाफा कमाते हैं और डिस्ट्रीब्यूटर पर दवाब बनाया जाता है | प्रशासन भी इनको पकड़ने मे सहयोग नहीं देता उलटे इसका आरोप भी डिस्ट्रीब्यूटर पर लगाया जाता है जबकि आज की तारीख मे नॉन सब्सिडी सिलिन्डर कितने भी लेने पर रोक नहीं है और कंपनियाँ आपस मे ही प्रतिस्पर्धा के रहते डिस्ट्रीब्यूटर पर ज़्यादा से ज्यादा घरेलू गैस बेचने पर जोर देती हैं |

धन्यवाद, 

भवदीय  

सुबोध अग्रवाल

प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति 2- माननीय उपराष्ट्रपति 3-माननीय प्रधानमंत्री 4- माननीय वित्तमंत्री

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