Wednesday, 9 December 2020

मीडिया के भगवान

 

मीडिया हर किसी को भगवान बना देता है | क्रिकेट का भगवान, ऐक्टिंग का भगवान | किसी दिन स्वयं को संचार और सूचना का भगवान घोषित कर देगा | पहले समाज में न्यायाधीश और डाक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया और अब किसान को | हिन्दु संस्कृति मे कण कण मे भगवान को माना गया | कौन कब किसके लिए भगवान के रूप मे प्रकट होगा या हुआ, इसका लेख जोखा रखना मुश्किल है | एक धनवान सम्पन्न शक्तिशाली समुद्र में  डूबते व्यक्ति के लिए मछली भगवान के रूप मे प्रकट हो सकती है तो किसी गरीब के लिए दूसरा गरीब आधी रोटी देकर | यह एक ऐसी श्रंखला है जिसमे हर कोई भगवान है | भगवान वो नहीं उसके माध्यम से भगवान द्वारा कराया गया कार्य भगवान है | आज सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर या फुटवालर कोई एक है तो कल दूसरा होगा, क्या भगवान बदल जाएगा ?

किसान अन्नदाता नहीं अन्न उगाता है | अन्नदाता तो भगवान को ही माना गया है | किसान की उपज को उगाने भर से मनुष्य के पेट मे नहीं पँहुचाया जा सकता | दूसरे बहुत से भगवान हैं जिनका इसमे सहयोग होता है | जब अन्न पैदा नहीं होता था तब भी संस्कृति और सभ्यता मौजूद थी, मनुष्य का पेट भरता था | किसान की उपज को जब तक आटे चावल का रूप देकर खाने लायक नहीं बनाया जाता तब तक उसका कोई मोल नहीं | क्या इसमे सहयोग देने वाले मजदूर, उद्योगपति, इंजीनियर, व्यापारी, ग्रहणी आदि की कोई हिस्सेदारी नहीं ? प्रत्येक को उसके हिस्से का श्रेय मिलना चाहिए | हिस्से से कम या अधिक नहीं | आकलन का अधिकार सबको है अकेले मीडिया को नहीं |

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