क्षमा के अलग अलग रूप हैं | पौराणिक काल में श्राप मिलने पर क्षमा याचना की गई परंतु कभी किसी को क्षमा नहीं किया गया | उसे दंड मिला या फिर प्रायश्चित करना पड़ा | ऐतिहासिक घटनाओ और समय की यदि बात करें तो भगवान महावीर और भगवान बुद्ध के क्षमा करने के प्रसंग मिलते हैं | दोनों ने ही मौखिक क्षमा की बात न करते हुए अंतर्मन से दूसरों को क्षमा कर स्वयं शांति की अनुभूति का रास्ता बताया | भगवान महावीर के क्षमा मांगने को एक त्योहार के रूप मे मनाया जाता है | संदेश स्वयं को अहंकार से दूर रखकर विनम्रता को शांति का साधन बताया |
उसके बाद क्षमा मांगना और करना एक ढोंग बन गया जो मध्य कालीन की यात्रा करता हुआ आधुनिक काल तक राजपूतों और मुस्लिम राजाओ से होता हुआ न्यायालय तक पहुँचा जिसमे क्षमा करने वाला स्वयं को उससे ऊपर और ताकतवर मानते हुए अपने अडम्बर और घमंड का प्रदर्शन करता है | मीडिया बंधु ने तो इसका मज़ाक बनाकर हर रोज मुहाबरे की तरह प्रयोग करना शुरू कर दिया है |
No comments:
Post a Comment