Friday, 24 August 2018

न्यायालय और न्याय



डाक्टर अस्पताल में ठीक से इलाज न करे, इलाज के दौरान तबियत खराब हो जाये या मरीज मर जाये, डाक्टर ड्यूटी पर न हो | मारपीट, हड़ताल, तोड़फोड़ अक्सर सुनने को मिलती है | क्या आपने कभी किसी जज या न्यायालय के विरुद्ध ऐसा व्यवहार देखा है, जबकि वह सालों साल आपको न्याय नहीं दे पाता, बिना बात तारीखों पर तारीखें देता रहता है, हर तारीख के लिए उसके सामने बैठा अधीनस्थ पैसे लेता रहता है, मोबाइल और फोटो अन्दर मना है, सम्मन जारी होने न होने की उसकी कोई जिम्मेवारी नहीं, किसी की हिम्मत नहीं कोई सवाल कर ले, किसी के भी विरुद्ध कोई भी टिप्पणी करे और दर्ज भी ना करे, शहंशाह की तरह, कोई जवाबदेही नहीं ?
वकील आपको सुबह 11 बजे बुलाता है खुद 12 बजे आता है | आप कोर्ट में जाते हैं, जज साहब अभी आये नहीं हैं, भीड़ बढ़ती जा रही है | यदि हड़ताल हो गयी तो डेट लेनी होगी, यदि नहीं तो भी डेट ही मिलेगी, आप 20-25 कि. मी. दूर से छुट्टी लेकर या काम छोड़कर आये हैं | वकील को फीस और जज साहब सारी सुविधायों सहित वेतन मिल रहा है | कितने केस सुने, क्या किया कोई नहीं पूंछ रहा है | समाज की सारी बुराइयों पर भाषण देने की ज़िम्मेदारी भी इनके ही कंधों पर है | चेक जैसे मामूली केस जिस पर 2 मिनट से ज्यादा का काम नहीं, 2 साल में बयान तक नहीं हुए | जब भी फैसला आयेगा जज साहब का सहयोग 2 मिनट का ही होगा | डाक्टर आपको या तो जल्दी ही स्वस्थ कर देता है या फिर आपकी बीमारी पर लाचारी दिखा सकता है, यहाँ तो आप हर रोज मर रहे हैं | पहले राजा न्याय करता था और उसकी समीक्षा उसके न्याय से होती थी, अब न्याय व्यवस्था न्यायालय के सुपुर्द और ज़िम्मेदारी किसी और की |

No comments:

Post a Comment