हमें नर्सरी से लेकर उच्च शिक्षा के स्तर व ज़रूरतों को
समझना होगा | आज सोशल मीडिया पर हासिल जानकारियों को देखते हुए इतिहास, भूगोल के
chapter कम करने की आवश्यकता है | साइंस, गणित, एकाउंट्स, साहित्य, आर्ट को ख़त्म नहीं
किया जा सकता | बच्चों पर बोझ कम करने की आवश्यकता है कुछ तो कटोती करनी पड़ेगी | creativity
और practical training, safety आदि के साथ भारतीय सभ्यता और अनुशासन, सफाई,
स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना भी आवश्यक है | Rules of the road, disaster
management आदि की जानकारी अति आवश्यक है | आज हमें T.V. पर बेहिसाब विज्ञापन देने
पड़ते हैं जो कुछ लोग ही सुनते देखते हैं, पके दिमाग पर इनका असर भी नहीं होता |
नन्हे बच्चे के कच्चे दिमाग पर जो भी पढाया जाएगा, असर होगा | सड़कों पर जाम
अनुशासनहीनता और जानकारी की कमी व penalty ना होने की वजह से लगते हैं जो समूचे
देश की productivity कम करते हैं और irritation पैदा करते हैं | safety, disaster
management, Indian culture के कोर्स पहले क्लास से लेकर उच्च शिक्षा ( डाक्टरी,
इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, साइंस, C.A. ) तक किसी ना किसी रूप में शामिल किये जाएँ |
बच्चों को नर्सरी से ही बागवानी, खेती, सुरक्षा बढई गिरी, लोहार
गिरी, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि की प्रैक्टिकल जानकारी खेल खेल में दी जानी चाहिए |
आप विभिन्न देशों के शिक्षा के तरीकों को देखेंगें तो
पाएंगे जापान में 10th standard तक बच्चा इंडस्ट्री में काम करने के लिए तैयार हो
जाता है | ग्रेजुएशन सभी नहीं करते और ऊपर इतनी भीड़ भी नहीं होती और नौकरी न मिलने
का मलाल भी नहीं होता | वहां ओवर टाइम मिला कर worker और manager की salary में
बहुत बड़ा फर्क नहीं होता |
उच्च शिक्षा का स्तर हमारे यहाँ बहुत नीचे है | IIT में भी
मेरा अनुभव अच्छा नहीं है| 1979 में रुड़की से mechanical इंजीनियरिंग पढकर और फिर
बच्चों द्वारा उसी IIT रुड़की से 2009 और 2013 इंजीनियरिंग करने का अनुभव बताता है
कि हमारी दिशा और दृष्टि अभी भी सही नहीं है | दोनों बच्चों द्वारा अमेरिका के
सबसे अच्छी यूनिवर्सिटी से कोर फील्ड में पोस्ट ग्रेजुएशन करने पर ही लगा कि
उन्होंने बहुत knowledge gain की है | हमारे यहाँ सिर्फ डिग्री बाटी जा रही
हैं | यहाँ IIT से पोस्ट ग्रेजुएशन से भी विशेष हासिल नहीं होता | जितनी मेहनत
वहां पोस्ट ग्रेजुएशन में करनी पड़ती है वह तो अब मै समझ सकता हूँ |
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