Saturday, 2 June 2018

क्या भारत में किसी को हड़ताल करने का अधिकार ?



आपको नौकरी मिली है सरकारी या प्राइवेट, कारोबार हो या प्रोफेशन | खाने कमाने का साधन और अधिकतर केस में पेंशन और स्वास्थ्य सुविधा मिली हैं | उसका क्या जो सारी उम्र मजदूरी करते करते 50-55 की उम्र के बाद इस लायक भी नहीं रह जाता | सभी का प्राकृतिक संसाधनों पर बराबर का अधिकार है लेकिन जो जितना ज़्यादा सक्षम है उतना ज्यादा उपभोग कर रहा है, हवा हो या पानी, खेती हो या मिनरल्स | हवाई जहाज से लेकर ट्रेन कार बस कपड़ा खाना घर होटल सड़क पहाड़ नदी सागर इत्यादि इत्यादि | हर व्यक्ति और संगठन अपनी तुलना अपने से ज्यादा बईमानी से कर रहा है | बैंक कर्मी कहता है एक दिन के MLA / MP को पेंशन क्या सभी सुविधाएं मिलती हैं, हम क्यों नहीं अपने अधिकार के लिए लडें | अरे भाई उनसे अपने आप की तुलना क्यों करते हो? राजनैतिज्ञ तो अपने सीने और पीठ पर “ हम बईमान “ का ठप्पा लगाए बेशर्मी से घूमते हैं | अपने आप को क्यों नहीं उस व्यक्ति से compare करते जो आपके साथ लाइन में खड़ा था लेकिन आपका नम्बर आ गया और वह रह गया, इसलिए नहीं कि आप ज्यादा काबिल थे ? हो सकता है आप ज़्यादा काबिल हो भी तो क्या वह सिर्फ आपकी कमाई है या प्रकृति द्वारा आपको दिया गया अच्छा दिमाग और परिश्रम करने की क्षमता ? धन्यवाद करें प्रकृति और समाज का |
अपने अधिकार की लड़ाई लड़ना कोई गलत बात नहीं लेकिन बग़ैर उस समाज का नुकसान पहुंचाए जिसके आप ऋणी हो | सीखिए उन महाराष्ट्र के किसानो से जिन्होंने भारत में ही लाखों कि संख्या में प्रदर्शन किया, ना सिर्फ अनुशासन में रहकर बल्कि समाज और देश का विश्वास व प्यार जीतकर| भ्रान्ति है कि अपने अधिकार के लिए हड़ताल एक ही रास्ता है | दूसरों को कष्ट देने की जगह खुद को कष्ट दीजिये यदि अधिकार की लड़ाई लड़नी है |

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