Thursday, 15 July 2021

विषय: कोरोना काल मे छोटे बच्चों के स्कूल और न्यायालय छोड़ सब कार्यरत

 

Registered by Supreme Court of India 41958/SCI/PIL(E)/2021


सेवा में,                                      दिनांक : 23-04-2021

माननीय मुख्य न्यायाधीश                                                                                                      

सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली

विषय: कोरोना काल मे छोटे बच्चों के स्कूल और न्यायालय छोड़ सब कार्यरत

महोदय,

कोरोना काल मे इंजीनियरिंग मेडिकल management सहित सभी कॉलेज की पढ़ाई अन्य उपायों से चल रही है | व्यापारी दुकान और प्रतिष्ठान खोल रहे हैं | बैंक अस्पताल और रेस्टोरेंट भी काम कर रहे हैं | पेट्रोल डीज़ल और गैस की सप्लाई भी बदस्तूर है | ट्रांसपोर्ट और इन्डस्ट्री अपना काम कर रहीं हैं | मीडिया और चार्टर्ड accountant भी काम कर रहे हैं | पुलिस  प्रशासन डॉक्टर और सफाई कर्मचारी पहले से ज़्यादा काम कर रहे हैं | मंत्रालय और दूसरे ऑफिस भी बंद नहीं हैं | बंद हैं तो छोटे बच्चों के स्कूल की तर्ज पर न्यायालय | कोरोना क्या सिर्फ़ जजों और वकीलों को सताएगा ? क्या उनका कार्य अन्य विभागों मे अपनाए तरीकों से नहीं हो सकता ? न्यायालय को क्या आप एक अनावश्यक विभाग मानते हैं ? जज क्या तनख्वा और सुविधाएं लेकर दूसरे की मेहनत और risk पर काम कर रहे लोगों की सेवाओं जैसे खाना पीना बिजली पानी फोन इंटरनेट सूचना और मनोरंजन आदि का उपभोग करेंगें और कार्य नहीं करेंगे?

कोरोना का प्रकोप कम होने पर ही निचली अदालतों को आपने कुछ दिनों कुछ कोर्ट वर्चुअल सुनवाई पर शुरू किया था और फिर वह भी बंद कर दिया | जिनके पास सुविधा है और वर्चुअल सुनवाई के इच्छुक हैं उनको क्यों नहीं सुना जाना चाहिए ? जो काम आपने कोरोना का प्रकोप कम होने पर कुछ दिनों के लिए निचली अदालतों मे कुछ कोर्ट मे किया था वह बाकि दिनों मे कोरोना का प्रकोप के रहते क्यों नहीं हो सकता ? जो काम आपने कोरोना का प्रकोप के रहते एक तरह के कोर्ट मे किया वह दूसरे तरह के कोर्ट मे क्यों नहीं हो सकता ? जितना काम निबट जाएगा उतना वर्क लोड कम ही होगा |

न्यायालय को अब आवश्यक सेवा अधिनियम मे ले आइये और 16 x 7 ( 16 घंटे रोज सप्ताह के सात दिन ) प्रणाली लागू करिए | समयबद्ध और सुनवाई की तारीखों की अधिकतम संख्या सीमा तय करिए | वकीलों द्वारा बार बार और बारी बारी applications लगाकर सुनवाई को अनंत काल तक चलाने की प्रवृति को खत्म कीजिए | जजों पर Result oriented work system लागू करिए |

संविधान और कानून मे बिना परिवर्तन कराए चुनाव प्रणाली मे सुधार करने वाले स्व. श्री टी. एन. शेषन जी का नाम आज भी सबको याद है जबकि अन्य 10-20 मुख्य चुनाव आयुक्तों मे से किसी का नाम मुश्किल से ही कोई बता पायेगा |

भवदीय,

सुबोध कुमार अग्रवाल          

प्रतिलिपि: 1- माननीय राष्ट्रपति   2- माननीय उपराष्ट्रपति

                 3- माननीय प्रधानमंत्र   4- माननीय कानून और न्याय मंत्री

 

 


 

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