Thursday, 6 September 2018

यह कैसा प्रजातंत्र



यह कैसा प्रजातंत्र जहाँ नारे लगाने वाले को तो आजादी है सड़क हो या कालोनी या रेलवे स्टेशन या कोई ऑफिस | आप ट्रेन बस हवाई जहाज में रेडियो नहीं बजा सकते यदि सह यात्री को आपत्ति हो लेकिन शोर शराबा कर सकते हैं | अरे भाई मेरी भी कोई आजादी है कि नहीं ? मेरे विरुद्ध तो आप नारेबाजी कर नही रहे तो फिर मुझे क्यों मानसिक और रास्ता रोककर शारीरिक पीड़ा पहुंचाते हैं ? मेरा भी कोई संवेधानिक अधिकार है कि नहीं ? आप सड़क बंद करते हो, बाज़ार बंद करते हो, रेल रोकते हो, सरकारी और गैर सरकारी बस कार ट्रक और दूसरी गाड़ियाँ तोड़ते हो | आपका विरोध मुझसे है या फिर उस विभाग या सरकार से ? मुझे आप कैसे परेशान कर सकते हो ? आप कैसे मुझे मेरे काम पर जाने से रोक सकते हो ? जो संपत्ति आप नष्ट करते हो वह मेरे देश की है और उसमे मेरा भी 130 करोडवां हिस्सा है | कैसे न्यायालय सब चुपचाप देखता रहता है, इसलिए कि न्यायालय में अभी तक इस तरह की तोड़ फोड़ नहीं हुयी है और वह तो ज़बरदस्त सिक्यूरिटी से घिरा है | safety valve यदि नारे लगाने वालों और रास्ता रोकने वालों के लिए आवश्यक है तो इनको हर शहर में जगह alot कर दी जाये मेरा हक यह कैसे छीन सकते है ? न्यायाधीशों को अपने लिए सुरक्षा और टोल पर अलग लेन चाहिए लेकिन मुझे जीने की आजादी भी नहीं !

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