गडकरी जी को वाहनों से लाल बत्ती प्रथा ख़त्म करने के लिए धन्यवाद और अभिनंदन|
लेकिन दिमाग में तो अभी भी लाल बत्ती जल रही है उसके लिए ज्यादा नहीं तो कुछ तो और
किया ही जा सकता है | आप स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार आदि पर आज भी भारत सरकार, राज्य
सरकार, सांसद, विधायक, ग्राम प्रधान, अध्यक्ष, BJP, सपा, बसपा, कांग्रेस, DM, ADM,
DSO, पुलिस, वित्त विभाग, railway, प्रेस, advocate आदि लिखा पाएंगे | आपने पहले
ही पुलिस और एम्बुलेंस को लाल/ नीली बत्ती की सुविधा दे रखी है तो फिर विचार कीजिए
कि आखिर ऐसा क्यों ? असल में पहचान बताने की होड़ और दबदबा बनाने कि मानसिकता ही
विवाद की जड़ है | दूसरों पर दवाब बनाने का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीका, सड़क हो
या पार्किंग या टोल आदि | क्यों किसी को भी यह विशेषाधिकार मिलना चाहिए, सड़क हो या
पार्किंग या फिर टोल | सभी के लिए टोल ज़रूरी होना चाहिये राष्ट्रपति ही क्यों न हो
? सरकारी ड्यूटी पर है तो नियमानुसार दफ्तर से पेट्रोल आदि के साथ रसीद संलग्न
करें | गडकरी जी इसे यदि लागू कर दें तो ना सिर्फ़ उनकी आमदनी बढ़ेगी, झगड़े कम हो
जायेंगें | सिर फूटने और गोलियां चलनी कुछ तो कम हो जायेंगीं | राज्य सरकारें
चाहें तो उनके लिए अपना खजाना खुला छोड़ दे | उनको हर महीने खूब पैसा टोल के नाम पर
दें लेकिन टोल दिए बगैर गाडी पास ना करें | गंदी मानसिकता पर कुछ तो लगाम लगेगी |
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