Wednesday, 7 February 2018

सांसदों और विधायकों की सैलरी



बड़े ज़ोर से चिल्ला चिल्लाकर सभी राजनेता कहतें हैं कि हम समाज सेवा के लिए आये हैं तो फिर उन्हें क्यों सैलरी लेनी चाहिए और खासतौर पर उन्हें जो पहले ही खूब कमा रहें हैं, अपनी ज़रुरत से भी ज्यादा | आपकी यदि कोई आमदनी नहीं है या फिर इतनी कम कि आप जीवन यापन नहीं कर सकते तो फिर आपको अपने खर्चे के लिए बेशक लेना चाहिए| आप अपने पास से यदि समाज के लिए खर्च नहीं करना चाहते ( जबकि समाज और धर्म के नाम पर तमाम लोग दान देते हैं और संस्थाएं चलातें हैं ) तो फिर प्राइवेट और सरकारी कम्पनी की तरह अपने ट्रेवल. पेट्रोल और होटल खर्च आदि के बिल लगाकर क्लेम करें | क्यों आपको भत्ता दिया जाये या टोल पर फ्री आने जाने की आजादी ? आपको अपने क्षेत्र में आवास जिसमे ऑफिस की सुविधा हो, दिया जाये | आप जो भी खर्चा करें या सैलरी लें उस पर आम आदमी की तरह ही टैक्स क्यों ना लिया जाये ? आपको और कर्मचारियों की भांति ही सैलरी और बेनिफिट्स क्यों ना दिए जाएँ ? रिटायरमेंट बेनिफिट और पेंशन का तो कोई औचित्य ही नहीं है | यदि आपकी कुल सैलरी मान लीजिये रूपये 1 करोड़ फिक्स की गयी है और आप पहले ही 1 करोड़ से ज़्यादा कमा रहे हैं या फिर इस वित्त वर्ष में 1 करोड़ से ज्यादा की return फाइल करते हैं तो फिर किस अधिकार से आप सैलरी ले सकते हो ? यदि आपकी इस वित्त वर्ष में आमदनी 1 करोड़ से कम है तो आपको निश्चित की गयी सैलरी और उस वित्त वर्ष की आमदनी का difference मिलना चाहिए | चुनाव के लिए खर्च करने का सैलरी या आमदनी से कोई सम्बन्ध नहीं हो सकता क्योकि चुनाव तो हारने वाला भी लड़ता है | Election reform के लिए मैंनें एक ब्लॉग पहले ही लिखा है | वित्त मंत्री आम आदमी से देश के लिए सहयोग की अपेक्षा करते हैं, कुछ अपेक्षा स्वयं से व दूसरे राजनेताओं से भी करें | सिर्फ प्रधान मंत्री के कंधों पर यह ज़िम्मेदारी नहीं होनी चाहिए | अच्छा होगा यदि राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति, राज्यपालों को भी इस कैटगरी में शामिल कर लिया जाये | वैसे भी इन पदों और उम्र के इस पड़ाव पर पहुँचने के बाद पैसे और सुविधाएँ की चाहत समाप्त हो जाती हैं और हो भी जानी चाहिए | अवकाश प्राप्त राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति,अत प्रधानमंत्री, राज्यपालों, मंत्री आदि को सुरक्षा सुविधा देने का कोई औचित्य नहीं है | राष्ट्रपति को ब्रिटिश साम्राज्य की शान शौकत वाली सुविधाओं का कोई औचित्य नहीं है | यह सिर्फ़ खर्चा कंट्रोल करने की बात नहीं है बल्कि समाज में सादा, सरल और ईमानदारी से जीवन जीने का सन्देश भी होगा |

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